संतुष्टि - कोरोना से आत्मज्ञान - 2 5 months ago

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यह किताब हैरान-परेशान लोगों के इर्द-गिर्द घूमती, अंधेरे में, रास्ता दिखाती हुई, समाज की गंदगी को, दर्पण दिखाकर, कड़वा घूंट पिलाती है! जीवंत किरदारों में दर्द के साथ, गर्व छुपा हुआ है, औरत की तड़प, वेदना, शोषण का सटीक समाधन है, बिगड़े लोगों को सुधर कर, संसार में प्रेम और शांति की स्थापना करना चाहती है। मुख्य पृष्ठ पर, आदमी-औरत ने, आत्मज्ञान को पाया, अंदर कण-कण में समाया है, रेशमा, रेशु, पीहू, शर्मीली, कामिनी, रमेश की बीवी, रमेश, भोला इत्यादि की उलझी कहानियाँ खुद को, सुलझाकर, गीता ज्ञान कराते हुए, जीवन जीना सिखाती हैं, कोरोना से आत्मज्ञान कराती है!

Rounak Rai

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बायोडाटा रौनक राय जीवनवृत्त रौनक भाई का जन्म, भारत के हृदय, मध्यप्रदेश के जिला शिवपुरी में स्थित, एक छोटे से कस्बे, करैरा के एक गरीब परिवार में 25, मई 1988 में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय, शिवपुरी म.प्र. से एवं चित्रकला की स्नातक और स्नाकोत्तर की उपाधि, माधव ललित कला संस्थान, ग्वालियर म.प्र. से 2011 में प्राप्त की। भारत भवन, भोपाल में, गुरू यूसुफ सर के सटीक मार्गदर्शन में कला की बारीकियां सीखते हुए, अपनी खुद की व्यक्तिगत शैली का विकास कर, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति पाकर, कला के क्षेत्र में, खुदको स्थापित किया, जिसकी झलकियां इस प्रकार हैं-  प्रमुख पुरूस्कार- क) ‘जगदीश स्वामीनाथन‘ पुरस्कार, मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार प्रदर्शनी, खजुराहो नृत्य महोत्सव- 2015 ख) ‘श्रेष्ठ रेखांकन‘ पुरूस्कार, गूजरी महल संग्राहलय, ग्वालियर (म.प्र.)-2010  प्रमुख एकल प्रदर्शनीयाँ- 1. ‘रामायण की आत्मा‘ केनरीज नेशनल आर्ट फाउण्डेशन इंदौर (म.प्र.)-2019 2. ‘मासुम भावनाएं‘ ललित कला अकादमी, नई दिल्ली- 2015 3. ‘कुछ भावनात्क रेखांकन‘ 1 एवं 2, क्रमशः केनरीज नेशनल आर्ट फाउण्डेशन, इंदौर (म.प्र.)- 2016 एवं उज्जवल आर्ट गैलरी, गोवा- 2017 4. ‘गुस्सैल देवियां‘ प्रीतमलाल दुआ सभागार, इंदौर (म.प्र.)-2016 5. ‘चित्र, मूर्ति एवं संस्थापन‘ तानसेन कला वीथिका, ग्वालियर (म.प्र.)-2010  प्रमुख सामूहिक प्रदर्शनियां- 1. ‘18 अक्टूबर‘ विजुअल आर्ट गैलरी, नई दिल्ली- 2013 2. ललित कला अकादमी, नई दिल्ली में, ‘अभिव्यक्ति‘- 2014, ‘रेंज आॅफ विजन‘- 2013 ‘उद्दीपन‘- 2012, ‘परिक्रमा‘- 2012 3. ‘परिक्रमा‘ ओपन पाॅम कोर्ट, भारत पर्यावास केन्द्र, नई दिल्ली- 2012 5. चलित प्रदर्शनियां, ‘आर्ट प्रोमो इण्डिया‘ लक्ष्मण आर्ट गैलरी से भी पार्वती आर्ट गैलरी से चोलामण्डलम्, चेन्नई, तमिलनाडु- 2012 एवं ‘108 विनायक/कला नायक‘, सफेद सेक्ट्रम आर्ट गैलरी, बैंगलुरू कर्नाटक से कला दीर्घा, झालावाड़, राजस्थान से कला दीर्घा, एम.एस. विश्वविद्यालय, बड़ौदरा, गुजरात- 2016 6. ‘आरंभ‘ ए.आई.एफ.ए.सी.एस. नई दिल्ली- 2012 7. ‘तर्क‘ कला दीर्घा, एम.एस. विश्वविद्यालय, बड़ौदरा- 2015 8. ‘रेंज आॅफ विजन‘ तरबन हाॅल, आर्ट गैलरी, शिमला- 2016, चित्रकला परिषद्, बैंगलुरू कर्नाटक- 2013 9. ‘सामूहिक प्रदर्शनी‘ ललित कला अकादमी लखनऊ (उ.प्र.)-2015 10. जवाहर कला केन्द्र, जयपुर, राजस्थान में ‘रेंज आॅफ विजन‘- 2013, ‘स्टूडियो-11‘-2013, ‘कृति‘-2012 एवं 2013, ‘परिक्रमा‘-2012 11. ‘क्रिएटिव कैपर्स‘ होटल क्राॅउन प्लाजा, मयूर बिहार, नई दिल्ली- 2015 12. ‘स्टूडियो- 11‘ देंगले आर्ट गैलरी, पुणे, महाराष्ट्र-2013 13. ‘हस्ताक्षर समूह‘- 1 एवं 2, आटीर्जन आर्ट गैलरी, नई दिल्ली- 2012 14. ‘रोजा‘तानसेन कला वीथिका, ग्वालियर (म.प्र.)- 2008 15. बुन्देलखण्ड कला समिति की पहली एवं दूसरी कला प्रदर्शनी, झांसी संग्रहालय, झांसी (उ.प्र.)-2018, 2019 16. अखिल भारतीय प्रदर्शनियां, धूमिमल आर्ट गैलरी, नई दिल्ली- 2010, दक्षिण-मध्य क्षेत्र, सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर, महाराष्ट्र-2010, अमृतसर, पंजाब-2008, ‘अग्निपथ‘ नईदिल्ली-2006, कलानेरी आर्ट गैलरी, जयपुर, राजस्थान-2012-13, उज्जवल आर्ट गैलरी, गोवा- 2017-19 17. मध्यप्रदेश कला प्रदर्शनी, ग्वालियर (म.प्र.)-2008-10 18. रजा पुरस्कार प्रदशनी, ग्वालियर (म.प्र.)-2006 प्रमुख अखिल भारतीय कला शिविर, झांसी संग्राहलय, झांसी (उ.प्र.)-2013, संस्कार भारती, ग्वालियर (म.प्र. )-2008,कलारंग, कलासंग, ग्वालियर (म.प्र.)-2008, आर्ट टुडे, रानी सती मंदिर, झुनझुनू, राजस्थान-2017 एवं 2011 से केन्द्रीय विद्यालय संगठन में कला शिक्षक के पद पर, नियुक्त होकर, अपनी सेवाऐं दे रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में यह, उनकी पहली किताब है, परन्तु रौनक, एक पैदायशी कलाकार हैं, वह बचपन से ही, कला के क्षेत्र में, कुशल रहे हैं, खासकर चित्रकला, साहित्य एवं नाट्य कला में उनका रूझान काफी तीव्र है। लेखन में कविता, कहानी और उपन्यास में प्रवीण है, नवोदय में उनकी इन सभी कलाओं को खूब, फलने-फूलने का मौका मिला, मुझे आज भी याद हैं कि कैसे हम सब, उनकी कहानियों में वशीभूत होकर, रतजगा किया करते थे और फिर कैसे, उनके कुशल निर्देशन में, उन्हीं कहानियों का नाट्य रूपान्तरण कर, मजा लिया करते थे, जिनमें से ‘गुम्मा‘, ‘जूता‘ प्रमुख एवं अवस्मिरणीय हैं। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने, पहले चित्रकला को प्राथमिकता देकर, रेखा और रंग को सिद्ध किया और अब ‘कोरोना से आत्मज्ञान‘ पाकर शब्दों को जागृत किया है। वह कहते हैं, ‘‘रेखा, शब्द, रंग इत्यादि मात्र, भावनाओं की अभिव्यक्ति के माध्यम हैं, कला तो कलाकार के हृदय में, निवास करती है।‘‘ और इस आत्मज्ञान को पाने के लिए उन्होंने, कोरोना द्वारा लाए, लाॅकडाउन के एकांत में, आत्ममंथन हेतु, खुद को कमरे में बंद कर लिया, और खुद को टटोलकर, अंदर, आत्मिक, बंद दरवाजों को खोल दिया। इसी समुद्र मंथन से निकले, विचारों को एक किताब में समाहित कर, ‘कोरोना से आत्मज्ञान‘ नाम, उचित ही दिया है, कुछ ही महिनों में लिखी, इस किताब में, उनके सम्पूर्ण जीवन का निचोड़ जिंदा है। अभी भी वह अपनी दूसरी किताब, ‘रामायण की आत्मा‘ में व्यस्त हैं, जी हां, यह उनकी 2019 की एकल प्रदर्शनी का ही किताबीकरण है, उस प्रदर्शनी में उन्होंने रामायण की प्रमुख घटनाओं पर आधारित 30 चित्र एवं इन 30 चित्रों पर आधारित 30 कविताएं प्रदर्शित की थी, उसी कार्य को विस्तार देने में जुटे हुए हैं। -राहुल राय, अनुज से बढ़कर, एक मित्र के तौर पर, आंखों देखी। स्थायी पता- रौनक राय पुत्र श्री विशम्भर दयाल राय 15/158, यादव मोहल्ला, करैरा जिला शिवपुरी (म.प्र.)- 473660 मोवा. नं.- 9109897352 ई-मेल- [email protected] YouTube link - https://www.youtube.com/playlist?list=PLtKoCGYEM90egwWP3CrCde4fFyoZ5BJDk

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