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Rounak Rai

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कोरोना से आत्मज्ञान

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यह किताब मैंने कोरोना काल में परेशानियों से जूझते हुए, भावनात्मक रूप से सकारात्मक सोच के साथ लिखी है| पिछले कुछ महीनों से लॉकडाउन के कारण घर पर फालतू पड़े हुए, मुझे बहुत सारी पुरानी अच्छी-बुरी यादों ने चारों ओर से घेरा हुआ था| तब मैंने, हिम्मत के साथ यह फ़ैसला किया कि इस भयानक महामारी के बुरे समय में भी मैं, अपने कलाकर्म से इस विषाणुयुक्त पानी में कमल खिलाकर ही दम लूँगा जिससे मुझे तो शांति मिलेगी, दूसरों को भी बल मिल सकेगा| फिर क्या था, मेंने खुद की बैचेनी और दूसरों की परेशानियों को कविता के रूप में पेपर पर उतारना शुरू कर दिया| और आज मेरी यह कविताएँ और रेखांकन, कोरोना काल की लगभग हर समस्या का सही चित्रण प्रस्तुत करने में सफल हो रहीं हैं, इनमें दर्द के साथ गर्व भी समाया हुआ है| यह किताब आपके काम ज़रूर आएगी, इसी आश़ा के साथ मैं इसको प्रेम भाव से समाज के सुख हेतु समर्पित करने जा रहा हूँ| कोरोना के साथ इस भीषण युद्ध में हमारी विजय जरूर होगी, ऐसी शुभकामनाएँ इस किताब में निहित है, जो आपके आत्मबल को मजबूती देंगी ! - रौनक

Who is this book for?

यह किताब मेंने भावनात्मक कविताओं और कलात्मक रेखांकन पसंद करने वाले
पाठकों/ दर्शकों के लिए लिखी है जो कविताओं में
यथार्थ देखना पसंद करते है |

जिन पाठकों को कविता/ रेखांकन में रहस्यमयी लघुकथाओं की तल़ाश हैं
यह किताब उनके लिए एक यात्रा वृतान्त के समान, रोचक और मनोरम है |

- रौनक

Why are you writing it?

यह तो मेरी भावनाओं की अभिव्यक्ति मात्र हैं
लेकिन इन स्वतंत्र भावनाओं में समाज का हर रस समाया हुआ है
जो समय-समय पर कविता के रूप में प्रकट होते रहता है जिससे मुझे संतोष की प्राप्ति होती है |

इन कविताओ और रेखांकन ने मुझे आत्मज्ञान और आत्मबल प्रदान किया है
और अब मैं इस सुखमयी-ठंडक से परिपूर्ण किताब को
विश्व शांति हेतु समर्पित करने जा रहा हूँ |

मुझे पता है कि सारी दुनियाँ इस वक्त
कोरोना महामारी से जूझ रही हैं और ऐसे कठिन वक्त में
यह किताब,
सबको आत्ममंथन करने का मौका देकर सत्य के साक्षात्कार करा आत्मज्ञान से आत्मबल दे !
ऐसी कामना करते हुए,
हजारों मंगलकामनाओं सहित इस किताब को आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूँ !
आशा है आपको बहुत पसंद आयेगी |

- रौनक