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by

Nandita Basu

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Chapter 2 :

डूबता हुआ सूरज

डूबता हुआ सूरज डूबेगा तो चांद फ़िर देखेंगे ।

कैदे गम से फुरसत मिली तो फिर कुछ सोचेंगे ।।

चिंगारी ऐसी भड़की की खाक में सब कुछ मिला गई ।

बची है कुछ राख तो उसमें अब क्या ढूंढेंगे ।।

यकनीन बेवफा पे यकीन करना भूल थी ।

उस भूल की सज़ा हर सांस पे महसूस करेंगे ।।

दयार-ए-इश्क़ (प्यार की शुरुआत) का मज़ा अब खूब ले लिए ।

अब ज़रा गर्दिशे अय्याम (काल चक्र) के हाथों लूटेंगे ।।

गमज़दा है रोम-रोम आसुंओ का सिर्फ साथ है ।

चलो रोते-रोते अपने सारे पाप आज धोएंगे ।।

अब कोई एतबार नहीं, कोई इंतज़ार नहीं ।

ज़िंदगी का सफ़र अकेले ही तय करेंगे ।

बुत को खुदा मानकर इबादत की थी ।

बुत तो न बदला अब खुदा किसको कंहेगे ।।