Autho Publication
LrCfyIMYSjWFNM3a-3V28J7IBv1DMb2I.jpg
Author's Image

by

Anand Usha Borkar

View Profile

Pre-order Price

199.00

Includes

Author's ImagePaperback Copy

Author's ImageShipping

Pre-Order Now

Chapter 1 :

भाग 1

तारीख 05 अगस्त 2017, रात 01 बजे बंगाल के 'वादी ऐ हुसेन' श्मशान में एक लड़का न जाने क्या कर रहा है? उसकी आँखे बता रही थी कि वह कि किसी की तलाश कर रहा है, पर किसकी? वह भी इतनी रात को! जहाँ पर लोग दिन में जाने से घबराते है, वह रात में वहाँ पर क्या कर रहा था? वह श्मशान में करीब आधे घंटे से चल रहा था। उसकी लड़खड़ाती हुई चाल बता रही थी कि वह थक चुका है पर वह रूकने का नाम नहीं ले रहा था। वह किसी को ढूंढ़ रहा था? वह श्मशान से गुजर ही रहा था कि उसे एक चिता जलती हुई दिखती है पर वहाँं पर उस चिता के पास कोई नहीं खड़ा था। शायद, वक्त की कमी के कारण उसके अपने, उसे अकेला ही जलता छोड़ गये थे। कितनी मतलबी है ना यह दुनिया, "ना जीते वक्त लोगों के पास किसी के लिए वक्त होता है, नहीं उसके मरने के बाद" श्मशान मे तेज हवाए चल रही थी। श्मशान मे पत्ता भी हिलता था तो ऐसा लगता था कि जैसे कोई फुसफुसा रहा हो। वह लड़का आगे बढ़ ही रहा था कि वह देखता है, एक औरत ध्यान में बैठी हुई थी। वह औरत एक बड़े से पत्थर पर बैठी हुई थी। उसके चारो तरफ कंकाल की खोपड़ियां रखी हुई थी। उस औरत ने ध्यान में रहते हुए कहा "जिसे तुम ढूंढ रहे हो वह मैं नही हूँ।" उस औरत ने काले रंग का सुट पहना हुआ था, उसके माथे पर एक बड़ा सा काले रंग का टीका लगा हुआ था। वह लड़का यह सोचकर हैरान था कि उस औरत को उसकी मौजूदगी का कैसे पता चला? उसकी आँखे तो बंद थी। वह लड़का इस गुत्थी को सुल्जा पाता इससे पहले ही, उस औरत ने अपने दाये हाथ से बायी तरफ इशारा करते हुए कहा "जिसे तुम ढूंढ रहे हो, वह तुम्हे वहाँ पर मिलेगी।" वह लड़का उस औरत के बताए हुए रास्ते की तरफ जाने लगा। करीब 5 मिनट चलने के बाद, अचानक से उसे दैवीय शक्ति की अनुभूति होती है। जो लड़का कुछ देर पहले डर के मारे काप रहा था, अब वह निडर होकर चल रहा था। यदि श्मशान की एक तरफ घना अंधेरा था, तो दूसरी तरफ जगह-जगह पर रोशनी के लिए कुछ स्तंभ लगे हुए थे। उन्हीं रोशनी के स्तंभ के सहारे, वह लड़का आगे बढ़, रहा था। करीब 5 मिनट चलने के बाद उसने देखा, उसके सामने एक औरत, जिसकी उम्र करीब 28 वर्ष होगी, एक बड़े से पत्थर के ऊपर बैठी हुई थी। उसने सफेद रंग का सूट पहना हुआ था। उसके गले में सफेद मोतियों की माला थी प्रत्येक मोती के ऊपर ॐ लिखा हुआ था। इससे पहले जो औरत मिली थी, वह इस औरत से बिलकुल विपरीत थी। पहली वाली औरत को देखकर लगता था कि वह राक्षसों की पूजा करती होगी और यह औरत देवताओं की। इस औरत के सामने 25 वर्ष की एक लड़की बैठी हुई थी। उस लड़की के बाल खुले और बिखरे हुए थे। वह लड़की कभी दाये तो कभी बाये होते हुए बार-बार हिल रही थी और जोर-जोर से चीखे जा रही थी, कह रही थी "छोड़ दो मुझे... छोड़ दो...." हैरान करने वाली बात याह थी कि उस लड़की को किसी ने पकड़ कर नहीं रखा था, तो वह किससे कह रही थी? वह आदमी की आवाज़ में बाते कर रही थी। वह लड़की भगवा रंग की चादर के ऊपर बैठी हुई थी। उस औरत ने कहा "बहुत सता लिया तुने इस लड़की को, अब इसको छोड़ दे वरना" "नहीं... नहीं छोडूंगा....यह मेरी है मुझे इससे कोई अलग नही कर सकता...." उस लड़की ने आदमियों की आवाज मे कहा। 'तो तू नहीं मानेगा....." उस औरत ने गुस्से में कहा। वह लड़की और जोर-जोर से चीखने लगी। जैसे कोई उसको नोच रहा हो। वह औरत अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहती है "है! ईश्वर इस मासूम की रक्षा करो..... इसे इस दुष्ट आत्मा से बचाओ।" इतना कहकर वह औरत अपने बाये हाथ की मुट्ठी बाँधते हुए कहती है "ॐ पूव्रकपिमुखाय पच्वमुख हनुमते, सकल शत्रु सहरणाय।" जब मंत्र पढ़ के खत्म होता है। वह औरत बंद मुट्ठी उस लड़की पर फूकती है। वह लड़की चिल्लाने लगती है। वह औरत तीन बार मंत्र पढ़कर उस लड़की के ऊपर फूकती है। वह लड़की शांत हो जाती है। वह लड़की अब हिल, तक नहीं पा रही थी, न ही कुछ बोल रही थी। वह औरत अपनी जगह से उठती है और भगवा रंग की चादर उस लड़की पर डालती है। उस चादर से वह लड़की पूरी तरह ढक जाती है। जब वह औरत दोबारा मंत्र पढ़ना शुरूर करती है, तब वह लड़की फिर से जोर-जोर से चिल्लाने लगती है। वह लड़की ऐसे तड़प रही थी, जैसे कोई उसे गरम-गरम लोहे के सलिए लसा रहा हो। तभी वह चादर अपने आप बीच मे से धीरे-धीरे फटने लगता है और एक काला साया धुँए की तरह उसमे से निकलता हैं और आसमान की तरफ चले जाता है। वह लड़की शांत हो जाती है और बेहोश होकर गिर जाती है। वह औरत जिस बड़े पत्थर पर बैठी थी, वापस जाकर उस पर बैठ जाती है। वह लड़का यह सब देखकर बहुत डर गया था पर फिर भी वह बड़ी हिम्मत से उस औरत से पूछ्ता है "क्या आपका नाम सौम्या अग्रवाल हैं?" "बड़ा अजीब सवाल है यह तो; जिसे ढूंढ रहे हो यही नहीं पता वह कैसी दिखती है.... हाँ मैं हि सौम्या अग्रवाल हूँ।" उस औरत नें कहा "मुझे आपकी मदद चाहिए ।" 'यहां सभी मदद ही माँगने आते है। सौम्या ने कहा "कहो क्या मदद कर सकती हूं मैं तुम्हारी?" "उसके लिए आपको मेरे साथ चलना होगा ।" "माफ करना मुझे पर मैं तुम्हारे साथ नही चल सकती। इससे पहले कई लोग यहाँ आए और मुझे अपने साथ ले गये पर डर के मारे खुद अपनों को अकेला छोड़कर भाग गये। अपनी आँखो के सामने मरते देखा है मैंने उन्हें।" सौम्या ने कहा "पर मैं उनमे से नहीं हैं, जो मुसिबत के वक्त अपनों को अकेला छोड़ देते हैं.... मुझे किसी भी कीमत पर मेरी एंजल की जान बचानी है, चाहे उसके लिए मुझे मेरी जान क्यो न देनी पड़ें....मुझे जानाना है मेरी एंजल के अंदर किसकी आत्मा है? और क्यो वह एंजल के पीछे पड़ी है? "जिन आत्माओ के बारे मे तुम जानना चाहते हो, उस दुनिया के बारे में जानना आसान नही हैं....नहीं वहाँ पर तुम्हें कुछ दिखाई देगा, नहीं कुछ सुनाई देगा..बस हर पल डर सताते रहेग। वह तुम्हे हर वह तकलीफ देगे, जो तुमने कभी अपने सपने मे भी नहीं सोची होगी। तुम्हारे अपनों को तुम्हारे सामने इतना सताएऐगें कि तुम खुद उन्हे उन आत्माओं के साथ छोड़ दोगे ।" "नहीं......मैं कभी अपनी एंजल का साथ नहीं छोडूंगा, चाहें कुछ भी हो जाए...। भले हि मैंने उसके साथ सात फेरे नही लिए हो पर सात जन्मो तक जीने मरने का वादा जरूर किया था । वादा...वह तो दिख ही रहा है। तुम्हारे पैर जो इतने कप-कपा रहे है। डर तुम्हारी निगाहो में साफ-साफ दिख रहा है।" सौम्या ने उसके पैरो की तरह देखते हुए कहा। "हाँ डर लगता है मुझे पर मरने से नहीं.... डर लगता है कि कही मैं उसे खो न दू, डर लगता है कि कही उसे कुछ हो न जाए, डर लगता है कि कही हम जुदा न हो जाए।' उस लड़के ने अपने हाथ जोड़ते हुए कहा। मैं बहुत दूर से आया हूं इस उम्मीद के साथ कि आप हमारी मदद करोगी ।" "कहाँ से आए हो तुम और किसने तुम्हे यहाँ भेजा है? सौम्या ने कहा। "राजस्थान के दबकन से आया हूं मैं, मुझे पण्डित वेदव्यास जी ने भेजा है और उन्होने ही आपका पता बताया था । 'क्या कहाँ तुमने पण्डित वेदव्यास जी ने।" सौम्या ने चौककर कहा। कुछ पल के लिए सौम्या चुप हो गयी थी। ऐसा लग रहा था कि वह अपने अतीत कि यादो में खो गयी हो, पता नहीं उसने क्या देखा और सोचा? अगले ही पल वह, उस लड़के के साथ चलने के लिए राजी हो जाती है। उसी सुबह तारीख 5 अगस्त 2017, समय 10:30 वह लड़का और सौम्या ट्रेन में बैठे हुए थे। सौम्या खिड़की के पास बैठी हुई थी। उसके बगल मे एक पोटली रखी। हुई थी, जिसमें उसका सामान रखा हुआ था। वह पोटली भगवा रंग की थी और उसके ऊपर स्वस्तिक का निशान बना हुआ था। उस पोटली को देखकर लग रहा था कि उसमे कुछ कीमती सामान रखा होगा। वह लड़का, सौम्या के सामने बैठकर उसके चेहरे पर दायी आँख के पास बने, काले गहरे निशान को देखे जा रहा था। वह निशान काफी गहरा था। उस निशान ने सौम्या के चेहरे की खुबसरती बिगाड़ दी थी । सौम्या हमेशा उस निशान को अपनी जुल्फो से छुपा कर रखती थी पर इस वक्त उसका ध्यान स्टेशन मे लगी भीड़ पर था। जब उसका ध्यान स्टेशन से हटा तो उसे लगा, वह लड़का उसका निशान देख रहा है फिर उसने अपनी जुल्फो से वह निशान छुपा लिया। 'तुम्हारा नाम क्या है? सौम्या ने उस लड़के से कहा। विराट......विराट सिंह नाम है मेरा' विराट के इतना कहते ही ट्रेन स्टेशन से रवाना हो जाती है। 'कौन है वह लड़की? जिसके लिए तुम इतनी दूर बंगाल आ गए और पण्डित वेदव्यास जी ने तुम्हें मेरे पास क्यों भेजा? उनके पास भी तो दैवीय शक्ति है। वह तो मुझसे बेहतर तरीके से बूरी शक्तियो से लड़ सकते है। मेरी शक्तियां उनके सामने कुछ नहीं है। "यह सब तो मुझे नहीं पता कि उन्होंने मुझे आपके पास क्यों भेजा? पर बस इतना कहा था कि 'अब सही वक्त आ गया है..सौम्या को बुलाने का...और हाँ यह भी बताया था कि एंजल के अंदर जो आत्मा है वह बहुत ताकतवर है। वह अघोरिय प्रवर्ती की आत्मा है मतलब उसके पास चुलैड़, डायन, पिशाच और कई शैतानीय ताकते है। 'क्या कहा अघोरिय प्रवर्ति की!" सौम्या ने चौंककर कहा। इतना बोलकर वह फिर अपने अतीत की यादो मे खो जाती हैं और कहती है "हाँ शायद अब वक्त आ गया है, पूराने जख्मों को भरने का।" "आप कैसे जानती है पण्डित वेदव्यास जी को?" "यह सब छोड़ो तुम..पहले यह बताओ, मैं तुम्हारी कैसे मदद कर सकती हैं" सौम्या ने विराट की बात को काटते हुए कहा। "और कौन है वह लड़की जिसके लिए तुम अपनी जान तक कुर्बान करने के लिए तैयार हो? तुम्हे अपने बारे में मुझे सब कुछ बताना होगा, तभी में तुम्हारी मदद कर पाऊगी।" "ठीक है, मैं आपको अपने बारे में सब कुछ बताता हूं ।"