Autho Publication
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Advocate Ravindra Lamba

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Chapter 1 :

आज के दौर में हम किसी भी दूसरे पर तब तक निर्भर नहीं रह सकते जब तक कि हम खुद पूरी तरह से आत्म निर्भर न हो । यह रचना अपना सबसे पहला धर्म यही निभाती है और हर मायने में आपको एक ताकतवर ईनसान बनाती है जो कभी भी आपको टूटने नहीं देती ।।

"आत्मरक्षा मेरा हक,किसी भी कीमत पर"... अपने आप में यह शिरषक न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में किसी भी इंसान पर होने वाले अत्याचार,अपराध,उत्पीड़न के साथ साथ इंसान के अंदर के ड़र,मायूसी,झीझक और नकारात्मकता को भी अब और नहीं सहने की एक कसम है ।। धन्यवाद ।।