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by

मुकेश सिंह

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Chapter 4 :

अगर तुम मेरे होते

अगर तुम मेरे होते अगर तुम मेरे होते तो तुम्हें न हम कहीं जानें देते। अपनी निगाहों में बसाकर हर घड़ी तुम्हारा ही दीदार करते। अगर तुम मेरे होते तो होंठों की लाली बन हम तुम्हारा श्रृंगार करते। और तुम्हें दिल की धड़कन बना बस तुम्ही से हम प्यार करते। अगर तुम मेरे होते तो खुश्बू बना तुम्हें अपने अंग-अंग में बसा लेते। तुम्हारी एक मुस्कान की खातिर जहां की सारी खुशियां लूटा देते। अगर तुम मेरे होते तो मीठे गीतों सा हम तुम्हें गुनगुनाते बना राधिका तुमको कृष्ण सा हम रास रचाते। अगर तुम मेरे होते तो इंद्रधनुष के रंगों से हम परियों सा तुम्हें सजाते अपने हाथों की लकीर बना जन्मों तक तुम्हारे ही रह जाते।। मुकेश सिंह सिलापथार,असम। 9706838045 Thanks and Regards Mukesh Singh Poet, Columnist 9706838045